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Monday, October 18, 2010

बचपन से सीखो ज़िन्दगी जीना..

" काश ! खुदा मुझसे कहता किसी रोज़,


बता तुझे सीखना हो अपनी बीती ज़िन्दगी से ,

तो वो क्या होगा?

मैं कहता खुदा से,

"मुझे फिर से मुझे मेरे बचपन में पंहुचा दे,

इस ज़िन्दगी की दौड़ भाग से,

थोड़ी सी आज़ादी दिला दे.

न सुकून हैं यहाँ, बस दौड़ हैं आगे और आगे की ,

मुझे मेरे बचपन के वो अल्हड दिन फिर दिला दे.

छोटी छोटी बातो में रूठने और बिना किसी बात पर,

जोर जोर से ठहाके लगाना फिर से सीखा दे.

यु बिना काम के घंटो घूमना फिरना ,

बिना सोचे समझे दिल की बात कहलाना सिखा दे.

बिना किसी भेदभाव के किसी से दोस्ती कर लेना,

माँ की डाट को एक कान से सुनकर दूसरी कान से निकालना सीखा दे.

पापा अगर किसी बात पर लगा भी तमाचा तो,


अगले ही पल फिर उनसे किसी बात के लिए जिद करना सीखा दे.

आगे क्या होगा , कैसे होगा की फिक्र छोड़ बस उस वक़्त में जीना सीखा दे. "

1 comment:

  1. bahut khoobsurt
    mahnat safal hui
    yu hi likhate raho tumhe padhana acha lagata hai.

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