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Wednesday, April 27, 2011

असमंजस ..................

छोटा सा टॉप और जींस पहनकर , 
वो बस में सफ़र कर रही थी, 
कही से कुछ न दिख जाये, 
बार बार टॉप और जींस को एडजस्ट कर रही थी, 
फिर अपने आस पास के लोगो की घूरती निगाहों से, 
बचने का प्रयास कर रही थी. 

मैं ये सब माजरा देख रहा था, 
लड़की को फैशन के चक्कर में, 
परेशान होते देख रहा था. 
अब ये दुनिया के साथ चलने की कवायद थी उसकी, 
या यार दोस्तों से पीछे रहने का डर उसे सता रहा था. 
कुछ भी कारण हो वो खुद को बड़ी असहज पा रही थी. 

2 comments:

  1. बहुत खूबसूरती के साथ शब्दों को पिरोया है इन पंक्तिया में आपने

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  2. You are becoming naughty but observing the world as it is.Fashion trends- sometime brings the feeling of uncomfortabilty and cause threat to inner soul and sometimes it becomes threat to societal tabboos.However well observed, well felt, nicely worded and as usual very contemporary.Keep it up!!

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