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Saturday, March 26, 2011

बस यूँ ही ............

ना उम्मीदी के  इस दौर में ,

फिर भी गाहे बगाहे कुछ,

सूरज की किरणे बिखर ही जाती हैं,

जो शायद हमें फिर से कुछ करने की,

प्रेरणा दे जाती हैं.



कभी डूबते सूरज को देख कर एहसास होता हैं,

जैसे ये अपने में समेट कर कितने राज ,

कितनो पलो की सौगात लिए छुप जाता हैं,

शायद उनको अच्छे बुरे में छाटने के लिए ,

एकांत में चला जाता हैं.



अवसाद बुरा नहीं हैं जीवन में,

अगर हम में लड़ने की क्षमता हैं,

जिजीविषा जीवन की यही तो हैं,

की हर हालात में खुद को बुलंद रखना हैं.

Friday, March 18, 2011

हैप्पी होली !

चहुँ और पेड़ो पर फूल खिलने लगे,


धरती करने लगी हैं अपना श्रृंगार,

मौसम ने करवट बदली ,

बहने लगी मस्त बयार.



फागुन का रंग चड़ने लगा सब पर,

रंगों से खेलने को सब हो गए तैयार.

सब राग द्वेष मिटाकर एक दुसरे को गले मिलाने ,

आ गया होली का त्यौहार.



( होली आपके जीवन में खुसियों और आनंद के रंग भरे)

Tuesday, March 15, 2011

हाहाकार.............

चारो तरफ देख हाहाकार ,


कितना हो गया मनुष्य लाचार,

कल तो जो डींगे भरता था,

प्रकति ने एक ही झटके में,

चूर किया उसका अहंकार.



अब देख रहा वो अंजाम,

छेड़ा छेडी जो उसने की थी प्रकति के साथ,

अब उसका परिणाम देख कर,

रूह भी काँप गयी आज.



दूर से अब देख कर विनाश,

सबको आयी उस खुदा की याद.

संतुलन बिगाड़ा तो अब सजा भी तो भुगतने को,

तैयार रह आज के इंसान.



( यह कविता जापान में आये भूकंप के बाद की स्थिति को ध्यान में रखकर लिखी गयी हैं)

Saturday, March 12, 2011

ज़िन्दगी की उलझन ........



जब छोटे थे तो सोचते थे, कब स्कूल जायेंगे,

और हम बस्ता टांग कर शान दिखायेंगे.

स्कूल पहुचे तो लगा ये कहाँ आ गए ?

फिर सोचा कब कोलेज जायंगे और ?

स्कूल के ये रोज़ रोज़ के झंझटो से कब आज़ादी पाएंगे?

स्कूल खत्म हुआ कोलेज पहुचे थोड़ी दिनों में वहा से भी उकता गए.

नौकरी करते लोगो को देख अपने भी अरमान हरे हो गए.

नौकरी लगी, थोड़े दिन अच्छा लगे,

फिर डंडे पड़ने शुरू हुए.

कुछ साल नौकरी करने के बाद एहसास हुआ ,

उफ़ ! ये किस जंगल में फंस गए.

अब कभी सोचते हैं कब नौकरी से छुटकारा मिले,

Monday, March 7, 2011

नारी - महिमा अपरम्पार .........



बेटी बनकर तुने महकाया अपने माँ बाप का आँगन ,

बहन बन तुने भाई को दिया स्नेह का संसार.

पत्नी बन तुने पति के सपनो को दिया एक नया आकार,

माँ बन तुने अपने बच्चो को दिए कितने संस्कार.

हर रूप में तू निराली हैं, तेरा बिना ये संसार ख़ाली हैं.

तू जगत जननी तेरी महिमा अपरम्पार हैं.

Happy Women day- Salute to every woman.

वो बदलेंगे तो हम बदलेंगे.......

वो बदलेंगे तो हम बदलेंगे,


बदलने की ये बयार बदलने का नाम नहीं लेती,

न वो बदलने को तैयार,

हमारी झिझक हमें पीछे खिचती,

शायद इसी कशमकश में,

बदलाव की आंधी कभी नहीं चलती.

हम रोज़ यु ही जीते चलते हैं ,

बुरा होते देख कर भी अपना इससे क्या लेना यार !

आगे बड़ लेते हैं.

जब हम पर बीतती हैं कभी,

तो हम "ज़माना कितना संवेदनहीन हो गया हैं " सोचते हैं.

यक्ष प्रश्न यह है - की बदलाव की आंधी लायेगा कौन,

ताकते रहे यु ही मुहं एक दुसरे का हम,

जमाने बीत जायेंगे.

मन में एक टीस सी लिए मर जायेंगे.

Wednesday, March 2, 2011

खुद से मुकाबला

खुद से मुकाबला कर यहाँ,


तेरे जैसा कोई नहीं.

अपनी सीमायों को लाँघ जरा,

तेरे लिए मुश्किल कुछ भी नहीं.

अपने रिकॉर्ड ही तुझे खुद तोड़ने हैं,

तेरे मुकाबले का को नहीं.

डर को निकाल बाहर ज़माने का,

क्यूंकि तुझे सँभालने की कोई जरुरत नहीं.

लक्ष्य बना इतना ऊंचा की,

जिसे छूने की कुव्वत तुझ मैं हो और किसी में नहीं.

असफलता और निराशा तुझे छूकर निकल जाये,

तू अटल, अडिग, अविचल , अविरल बहता जाये ,

लक्ष्य पूरा होने पर भी तुझे कोई थकन नहीं.