Amazon-Buy the products

Monday, May 30, 2011

क्या गम और क्या ख़ुशी ?

गम और ख़ुशी कुछ नहीं होता संसार में, 
बस भावनाओ का ज्वार और दिल का  बहकावा होता हैं. 
हमारे अनुसार हो गया तो ख़ुशी हो जाती हैं, 
हमारे अनुसार नहीं हुआ तो गम हो जाता हैं. 
अब ये हमारे दिल का छलावा नहीं हैं तो क्या हुआ? 
कुछ पल बीत जाने का बाद दिल को ही लगता हैं, 
जो ख़ुशी हैं उसमे भी कुछ गम हैं , 
और जो गम हैं वो भी ठीक हैं. 
गम और ख़ुशी के बीच ही झूलता रहता हैं मन, 
उलझा कुछ सुलझा बहकता रहता हैं मन. 

Friday, May 27, 2011

Life = Birth +……………………………….+Death


Life is a journey,
Begins with birth ,
End with death,
But in between Birth and death,
Every dot is ours and only ours,
How we convert these dots in to what,
This all depends on us.
Convert these dots into yours choice,
Add more dots as you can,
Convert every dot in to memorable page,
Make your life a readable book,
Set some path to pave others. 

Wednesday, May 18, 2011

You are not alone in the world …………….


When you are sad,
Remember you are not alone in the world.
When you are happy ,
Remember you are not alone in the world.
When the time against you,
Remember there are millions like you,
When everything is going in your way,
Remember there are thousands like you.
 One thing is sure in all times,
You are blessed with this beautiful life,
Which comes after journey of millions mile,
This is true that we are alive,
Whatever the time and whatever the situation,
Remember we are the special child.
But don’t forget to remember,
You are not alone in the world. 

Thursday, May 5, 2011

अप्रैल से लगाव....

अप्रैल का महिना हर नौकरीशुदा आदमी के लिए खास होता हैं, 
साल भर की उसकी मेहनत का इनाम उसे मिलता हैं, 
इसी आस में  वो ग्यारह महीने काट देता हैं, 
अप्रैल आएगा तो नयी खुशियों की सौगात लायेगा. 
कितने सब्जबाग वो जनवरी से देखने शुरू कर देता हैं, 
कल्पना में बड़े हुए पैसो का हिसाब किताब लगाना शुरू कर देता हैं, 
अप्रैल हर साल आता हैं और चला जाता हैं, 
देकर उसे कुछ मूंगफली के दाने, बादाम की आस अपने साथ ले जाता हैं. 
उसके सपनो में फिर तुषारापात होता हैं, 
" और बढ़िया काम करो " बॉस की ये बात सुन सुनकर , 
अपनी ज़िन्दगी के तमाम साल यूँ ही गुजार देता हैं. 

इन्क्रीमेंट ....


वो अपने इन्क्रीमेंट को लेकर नाखुश दिखा, 
रात भर सोचा और सुबह बॉस के पास पंहुचा, 
दिल की सारी भड़ास निकालने के बाद , 
बॉस को इस्तीफे देने की बात कहकर , 
चुपचाप अपनी सीट पर आ कर बैठ गया. 

थोड़ी देर सोचने के बाद फिर बॉस से टाइम माँगा, 
और फिर बॉस से मिलने चल दिया. 
बॉस  ने उसको कोफी पिलाई और कहां, 
" हाँ ! अब बताओ तुम्हे क्या कहना हैं, "
उसने एक सांस में अपने साथियों के उससे ज्यादा सैलरी  बड़ने का जिक्र किया , 
और पुछा , " सर, मैंने भी तो साल भर मेहनत से काम किया फिर मेरे साथ ऐसा सलूक क्यों किया?"
बॉस ने उत्तर दिया, " तुम अपनी सैलरी कम बढने से नाखुश हो या दुसरो की तुमसे ज्यादा बड़ी हैं, इससे परेशान हो.
मेरे हिसाब से तुम्हारी सही बड़ी हैं, तुम ही बताओ तुमने साल भर में ऐसा क्या किया, 
जो मैं कह सकू की तुम औरो से अलग हो.
इस साल कुछ असाधारण करके दिखाओ , अगले साल तुम्हारी हर इच्छा पूरी कर दूंगा "
वो बॉस की बात सुनकर मर्म समझ गया, पिछले दो साल में ३ बॉस को बदलते देख चुका, 
चुपचाप सीट से उठा , और फिर से अपने काम में लग गया. 

जय हो इन्क्रीमेंट की ! जय हो बॉस की ! 

Wednesday, May 4, 2011

रोज़ सुबह........

रोज़ सुबह सवाल करती हैं ज़िन्दगी मुझसे, 
आज नया क्या करेगा ? 
रोज़ शाम फिर मुझे कचोटती है, 
यूँ ही गवा दिया फिर तुने दिन एक नया. 
ये जदोजहद न जाने कितने सालो से रोज़ होती हैं. 
मैं रोज़ रात को फिर अगले दिन को यादगार बनाने की कसम खाता हूँ, 
अगले दिन फिर रात को अपने को वही पाता हूँ.