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Sunday, March 4, 2012

मिलकर जहाँ बनाना हैं ..



एक एक से अनेक बने , 
अनेक से बने एक कारवां, 
कारवां से बने एक समाज , 
समाज से बने एक देश, 
तो आओ की अब एक से अनेक बने, 
कारवां को गुंजायमान करे, 
समाज को फिर जीवन मूल्य दे ,
देश को फिर से शशक्त करे. 
फैला हैं जो अत्याचार , 
उसका विरोध करे , 
अपनी आने वाली पीढ़ी  को, 
आओ की एक उम्मीद  दे. 

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