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Saturday, February 18, 2012

खुदी तेरी और तू खुद का,

खुदी तेरी और तू खुद का, 
फिर तुझे सहारा किसका, 
अपनी तकदीर का मालिक तू खुद, 
अपनी राहो का अकेला राही तू खुद, 
तो चल , अपनी राह पकड़ ,
मुड़कर देख ना दुबारा, 
तुझे कोई फर्क नहीं  पड़ता , 
तेरे पीछे कोई हैं या तू चला हैं बिलकुल अकेला. 
लक्ष्य तेरा सामने और हौंसला तेरा खुद का, 
पा गया तो संतोष तेरा और ना पाया तो गम किसका?
तुझे क्या फर्क पड़ना नाकामयाबियो का, 
खुद से ही तो मुकाबला तेरा, 
दुसरे तेरी कुव्वत को क्या जानेगे, 
उनका काम तो हैं दुसरो को भीड़ में लेकर चलना. 
तू खुदी हैं और खुद  तू  अपने साथ खड़ा, 
चला चल बेफिक्र अपनी राह में खुद को खुदी साबित करना बस काम तेरा. 

Sunday, February 12, 2012

पांच घूरते शब्द .........कौन , कब , कहाँ , क्यों और कैसे ?



कौन है या था ?
कब हुआ या कब होगा?
कहाँ हुआ या कहाँ होगा ?
क्यों हुआ ?
कैसे हुआ या कैसे होगा ?
इन पांच शब्दों से ज़िन्दगी  बड़ी परेशान हैं, 
हर वक़्त ये शब्द घूरते रहते हैं ज़िन्दगी को , 
वो हर वक़्त इन्ही सवालो का उत्तर ढूँढने में बेहाल हैं. 
सोचो अगर ये पांच शब्द गायब हो जाये , 
तो ज़िन्दगी कितनी आसान हो जाये. 

Monday, February 6, 2012

लोगो का काम हैं कहना ........

अजीब कशमकश हैं ज़िन्दगी की, 
हम जब कुछ करते हैं, 
लोग कहते हैं ये देखो उसने कर दिया, 
कुछ नहीं करते तो लोग कहते हैं, 
अरे........वो तो कुछ नहीं करता. 
उलझन ज़माने की ये बड़ी हैं, 
उसे अपने दुःख -सुख से ज्यादा फर्क , 
इस बात पर पड़ता हैं उसने ऐसा कर दिया. 
कोई उन्हें ये समझाओ , 
वो जो कुछ  नहीं करता ,
उससे उसका ही बिगड़ना हैं, 
और वो जो कुछ करता हैं, 
उससे उसका ही सुधरना हैं, 
फिर क्यूँ बेवजह दुसरो की बातो में उलझा जाये, 
अपने ही दुखो को कुछ कम कर लिए जाये, 
या फिर अपने सुखो को और थोडा जीया जाये.