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Thursday, July 19, 2012

Let me fly......Let me fly....


Let me fly......Let me fly....
I want to touch the sky....
I want to see what next  after the horizon,
Where the sun take rest after the day, Where the moon hide in day...........
I want to see the beautiful earth from the sky, I want to compete with the birds that fly....
I want no boundaries for me, , there is no stoppage for mine.
Let me Fly ....Let me Fly ....I want to touch the sky...
I will follow the river which comes from the mountain, I want to fly over the sea,
I want to see where rich live, I want to see where poor dies,
I want to see everything that God made, I wanna to meet with the clouds.
I want to visit the deserts and want to fly over green fields.
Let me fly.......Let me fly... I want to touch the sky.

Thursday, July 5, 2012

दूसरा भाग - पुन : मिलन


कुछ सालो बाद बेटे का माँ को फ़ोन आया, 
" माँ, राहुल को विदेश में नौकरी मिल गयी हैं , 
अगले महीने वो चला जायेगा , 
कहता हैं , मौका मिलेगा तो यहाँ आऊंगा , 
वर्ना वही सेटेल हो जाऊंगा. 
अब हम क्या करे? एक ही तो बेटा हैं, 
वो भी दूर चला जायेगा , 
तो हम कैसे रहेंगे ? "
माँ बड़ी शांति से बोली , 
" कोई बात नहीं बेटा, उसको जाने दे. 
तू ऐसा कर, अब हमारे पास आ जा. 
हमें भी सहारा हो जायेगा , 
तेरे पापा को अब कम दिखता हैं, 
तू उनकी आँखे  बन जायेगा , 
मैं भी अब बहुत बूड़ी हो गयी हूँ , 
बहु के साथ मेरा टाइम भी कट जायेगा. 
रही तेरे बेटे की बात, 
धीरज रख ! वो भी एक दिन लौट के  आएगा. " 
बेटे को माँ की बातो से बड़ी तसल्ली हुई, 
सोचा , " माँ, सही तो कह रही हैं, 
जिस मकसद से शहर आया था, 
पूरा तो हो गया था, 
बच्चो को लिए सब कुछ तो कर लिया , 
अब जरा माँ -बाप की सेवा की जाये , 
क्या पता ? इसी तरह राहुल भी एक दिन वापस आ जाये. " 

Monday, July 2, 2012

पहला भाग - बिछोह .......


बेटे  ने घर छोड़ते हुए माँ बाप को कहाअच्छा ! अब मैं चलता हूँ , देर हो रही हैं ,
फिर मैं आपको फ़ोन दे के जा रहा हूँ
जब मर्ज़ी हो बात कर लीजियेगा और अगर कोई जरुरी काम पड़ातो मैं जाऊंगा. "
पिता ने कहा , " ठीक हैं बेटाशायद हम तेरे लिए यहाँ वो नहीं कर पाए जो तुझे आज लगता हैं
तेरे बच्चो का भविष्य यहाँ बिगड़ जायेगा, 
तू खूब तरक्की कर और खूब पैसा और नाम कमा
हम तो  बूड़े हो गए हैं , अब इस मिटटी से अलग होने का सवाल ही नहीं होता
बस इतना करना जब कोई बुरी खबर मिलेतो जरुर जाना.  
नहीं तो हम दोनों ने उम्र तो काट ही ली हैं , थोडा जो बची हैं - कट ही जाएगी
मगर तू  अपना ख्याल रखना."
माँ बोली , " ठीक हैं बेटा ! तुझे जो अच्छा लगता हैं , तू कर रहा हैं
फिर तू मुझसे जुदा थोडा हैं
तुझे छींक भी आएगी  परदेश में कभीतो मुझे खबर हो जाएगी
तू मेरा ही तो अंश हैं , मुझे तेरी खबर बिना फ़ोन के भी हो जाएगी
मगर अपना ध्यान रखना , टाइम पर खाना और टाइम पर सोना
पैसो के लिए ही मत भागना
बच्चो को बेमतलब डांटना मतबहु का भी हमारी ख्याल रखना
जा जी ले अपनी ज़िन्दगी , यहाँ क्या रखा हैंसिर्फ हमारे प्यार के सिवाय
सिर्फ प्यार से तो ज़िन्दगी नहीं चलतीज़िन्दगी में  और भी बहुत कुछ चाहिए
शायद हम तुझे कुछ नहीं दे पाएजो अब तू अपने बच्चो को देना चाहता हैं
खुश रहना और कभी कभार हमारी भी सुध ले लेना ."
बेटे , बहु और बच्चो ने माँ बाप के पैर छुए और चल दिए
माँ पल्लू से अपने गीली आँखों को पोछ रही थी
और पिता चुपचाप बच्चो को जाते हुए देख रहा था

(आगे क्या हुआ, अगले भाग में जरुर पढियेगा... )