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Monday, March 11, 2013

कारवां चलना चाहिए ........

हुंकार से पर्वतो को कंपा दे, 
अपने हाथो से नदियों का रुख मोड़ दे , 
गर्जना से जो बादलो को हटा दे , 
धधकती आग को जो पल भर में बुझा दे , 
पलक झपकते जो पहाड़ो को नाप दे , 
हालातो को जो अपने लिए मोड़ दे , 

अन्याय के लिए जो खुद को कुर्बान करने से न डरे , 
वो युवा अब हमें चाहिए और एक नहीं हजारो चाहिए , 
देश को सँभालने के लिए अब युवा चाहिए , 
बहुत हो चूका अब सब्र , 
देश हमारा हैं और हमें इसको सवारना हैं , 
एक नहीं पूरा रेला चाहिए , 

नौजवानों को अब हुंकार भरनी चाहिए , 
हर हालत में अब ये तस्वीर बदलनी चाहिए।
देश की तकदीर का  फैसला हमें ही करना हैं , 
क्यूंकि इसका भविष्य हमें ही तय करना हैं , 
अतीत से सबक लेकर वर्तमान हमसे ही बनना हैं , 
भविष्य रहे सुरक्षित हाथो में आज ही हमें तय करना हैं। 

जो जहां हैं,  जैसा हैं - मुमकिन कोशिश होनी चाहिए , 
कल कभी आता नहीं , अभी और इसी पल से शुरुवात होनी चाहिए , 
जो गलत हैं वो गलत हैं - कहने का साहस होना चाहिए , 
अन्याय और अत्याचार के खिलाफ जंग मुखर होनी चाहिए . 
ये धरती हमारी हैं और इस पर हमारा हक़ होना चाहिए . 

कारवां ये परिवर्तन का अब चलना चाहिए , 
राह कठिन भले ही हो , बढते चलना चाहिए , 
एक लक्ष्य के लिए सब युवा अब चलने चाहिए .