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Tuesday, March 18, 2014

हिसाब किताब ................

जीवन कि इस भागमभाग  में कुछ तो वक्त निकालना पड़ेगा,
कुछ देर कही थोडा बैठकर ,
कुछ तो हिसाब किताब लगाना होगा।

क्या खोया क्या पाया का हिसाब किताब भले ही न लगाये ,
मगर अब तक जो रास्ता तय किया हैं ,
उसको एक बार पलट कर देखना होगा,
आगे फिर कैसे बढ़ना हैं ? इसको तो तय करना  होगा ,

चंद फुर्सत के क्षण अपने को देने होंगे ,
अपने तरकश के तीरो को फिर से तराशना होगा ,
अपने अंदर के जूनून को फिर से जगाना होगा ,
सफ़र लम्बा हैं ज़िन्दगी का ,
अपने पसीने को थोडा सा तो  सुखाना होगा ,
अपने को जो भूल गया हूँ , उसे याद तो दिलाना होगा।

बेशक ! आगे बढ़ने कि ख्वाइश हैं तेरी  ,
उसमे किसी को गुरेज क्यूँ होगा ,
तू अपनी ज़िन्दगी का खुद मालिक हैं ,
किसी और क्या क्यों इस पर अख्तियार होगा ,

मगर  ………………
जीवन कि इस भागमभाग  में कुछ तो वक्त निकालना पड़ेगा,
कुछ देर कही थोडा बैठकर ,
कुछ तो हिसाब किताब लगाना होगा।  

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