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Saturday, June 13, 2015

नन्ही बूंद ....

प्यासी धरा ,
शोले बरसाते सूरज के बीच ,
जब वो नन्ही बूँद धरती पर गिरी ,
कमाल हो गया ,
धरती का रोम रोम जैसे फिर से खिल गया ,

नन्ही नन्ही बूंदो ने अपने को कुर्बान कर दिया ,
न देखा उसने अपना आसमां में रहने का सुख ,
समां गयी धरती की गोद में,
एक नन्हे पौधे को जीवन  दान दे दिया।

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