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Wednesday, July 15, 2015

कैसे है ? बढ़िया !

एक मित्र मिले रास्ते में , हाथ मिलाया और पूछा ," कैसे हैं ?"  !
हमने भी वही रटा रटाया दिया जवाब - " बढ़िया , आप सुनाओ "  !!

फिर बातचीत का दौर शुरू हुआ और पंद्रह मिनट तक चला !
हमने ऑफिस से बात शुरू की , मोहल्ले वालो की टांग खींची !!

थोड़ी राजनीती की  ऐसी तैसी करी , फिर थोड़ा सोसाइटी में हो रहे बदलावों की फिक्र करी !
"अच्छा यार संडे को फुर्सत से बात करते हैं " कहकर हाथ मिलाया और अपने घर की राह पकड़ ली. !!


घर आया , थोड़ा सुस्ताया और सोचा , " जब इतना कुछ हो रहा हैं , तो कैसे कोई बढ़िया हो सकता हैं ?" !
नौकरी का मेरे कल का भरोसा नहीं , कोई कुछ मदद करेगा ऐसे मेरे करम नहीं !!

बच्चों को कुछ सँस्कार दे सकूँ , इसके लिए फुर्सत नहीं !
राजनीति में कुछ असर असर डाल सकूँ , चुनाव के दिन वोट मैं  डालता नहीं !!

कुछ अपने भविष्य के बारे में सोचूं , कुछ सूझता नहीं !
खर्चे बढ़ गए हैं अब सैलरी से कुछ होता नहीं !!

सामाजिकता मेरी फेसबुक और व्हाट्सप्प में सिमट गयी हैं , पडोसी को में जानता नहीं !
सेहत के लिए कुछ करने की सोचूं तो पार्क मेरे घर के नजदीक कोई हैं नहीं !!

मिलावटी खाना खा खाकर  बीमार सा हो गया हूँ , ताज़ी हवा के लिए पेड़ पौधे नहीं !
अब आपसे पूछता हूँ , " कैसे हैं आप ? " , बढ़िया हूँ कहना नहीं !! 

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