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Sunday, January 24, 2016

जय हो , गणतंत्र !

जय हो , गणतंत्र !


राजपथ  पर देखकर वैभव हर साल निहाल होता हूँ !
देश मेरा तरक्की पर हैं , हर बार सोच लेता हूँ !!

सैन्य शक्ति देखकर सीमाओ को सुरक्षित समझ लेता हूँ !
रंग बिरंगा राजपथ देखकर "देश मेरा एक हैं " जान लेता हूँ !!

यक्ष प्रश्न फिर भी हर रोज़ परिलक्षित होता हैं !
"सब कुछ ठीक हैं जब " मेरे देश में , फिर हर रोज़ हंगामा क्यों होता हैं ? !!

काश ! हम गणतंत्र को समझ पाते !
लाखो कुर्बानियो का महत्व जान पाते !!

गणतंत्र के पावन ग्रन्थ - संविधान को समझ पाते !
अधिकारों की  हर बार बात करने वाले कर्तव्यो को भी निभाते !!

६६ वर्ष बीत गए - हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए ?
चले थे किस ओर हम , किस ओर पहुँच गए ?

जनता से , जनता द्वारा , जनता के लिए - जनसेवको को देश चलाना था  !
जनता को देश विकास में अपना हिस्सा निभाना था !!

धर्म , जात पात , ऊँच - नीच , अगड़ो - पिछडो का भेद मिटाना था !
भारत माँ के गौरव का रथ आगे बढ़ाना था !!

मुबारक हो गणतंत्र सबको  , एक और सरकारी छुट्टी आयी हैं !
देश को चलाने का ठेका नेताओ को देकर , हमने चैन की नींद पायी हैं !

जय हो , गणतंत्र ! जय हो , गणतंत्र ! जय हो , गणतंत्र !

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