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Monday, April 4, 2016

ख़ुशी और गम



थक गयी ज़िन्दगी भी  मुझे दर्द देते देते !
बोल ही उठी आखिर एक दिन मुझसे !!

“तू चल अब अपने रस्ते , मैं चलती हूँ अपने रस्ते !
परख लिया तुझे बहुत अब , उकता गयी हूँ तुझे  देखकर हर बार हँसते”!!

मैंने फिर मुस्कराते हुए जवाब दिया , “जब भी कभी गुमां हो जाये तुम्हे दर्द किसी को देते देते !
मेरा दरवाजा खुला हैं , तब भी मिलूंगा यू ही हँसते हँसते” !!

ज़िन्दगी ने कहा , " खुश हूँ तेरी ज़िंदादिली देखकर , कुछ माँग ले अपने लिए "!
मैंने कहा ," कुछ देना हैं तो एक काम करना ए - ज़िन्दगी , दर्द उसी को देना जो उसे संभाल सके " !!

"कितनो को तेरे  दर्द के बोझ तले तड़पता देखा हैं !
माफ़ करना तेरा नाम ही बदनाम होता हैं !!

दर्द देती हैं तो मरहम भी देना , मुस्कराते चेहरों को तवज्जो देना !
एक ज़िन्दगी मिली हैं सबको - ज्यादा से ज्यादा खुशियां और कम से कम गम देना”!!

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