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Monday, April 4, 2016

प्यार - मोहब्बत






एक रोज़ किसी ने मुझसे पूछा,
आपने प्यार मोहब्बत पर कुछ नहीं लिखा ,
मैंने भी हामी भरी ,
और कहा ,
" प्यार - मोहब्बत पर लिखने की औकात नहीं हैं मेरी  ,
ये विषय आधार हैं इस जहाँ का ,
शब्दों में बांधने की इसे ताकत नहीं हैं मेरी ,
प्यार - मोहब्बत शब्दों से परे का एक एहसास हैं ,
शब्दों से बयां हो ये जज्बात -आसान नहीं।

ये तो ऐसा एहसास हैं जो रूह तक उतरता हैं ,
गहराई का अनुमान करो  तो सागर तल भी छोटा लगता हैं ,
जज्बातो का सैलाब ऐसा -आसमां भी कम पड़ता हैं ,
अलग ही दुनिया सजती हैं जब प्यार होता हैं !!

यही एहसास एक दूसरे को बाँध के रखता हैं ,
जो शब्दों से ज्यादा आँखों से बयां होता हैं ,
जीवन डगर बड़ी आसान हो जाती हैं ,
जिस दिल में ये प्यार ताउम्र रहता हैं। " 

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