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Tuesday, June 21, 2016

आधुनिक कहकहे - भाग -3


बरसो मेघो इस कदर , सब कुछ धुल जाये !१ !
अहंकार , पाप , लालच - सब कुछ बह जाये !२ !
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 झूलती हैं हर रोज़ ज़िन्दगी , नौकरी और परिवार के साथ !१ !
दोनों जगह की आशायें बहुत हैं , ज़िन्दगी करती सीत्कार !२ !
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दोस्ती के पैमाने बदल गए , नहीं रही कृष्ण-सुदामा जैसी मिसाल !१ !
अब दोस्ती सोच समझकर होती , रखा जाता हैं स्वार्थ का ध्यान !२ !
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चुनाव से पहले नेताजी जोड़े सबके हाथ , "हम जनता के सेवक , करेंगे सेवा दिन रात " !१ !
चुनाव जीतने के बाद -जनता नेताजी को ढूंढे , नहीं मिलते फिर पाँच साल !२ !
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बँट रहा हैं ज्ञान सब जगह , ज्ञानियों की बढ़ गयी हैं तादाद !
दूसरों को लोभ -मोह- माया से दूर रहने को कहे , अपना हो रहे हैं आबाद !!
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खूब तरक्की कर ली हैं इंसान ने , चाँद पर रख दिए हैं पाँव !१ !
अपनी धरती को ख़त्म करने के लिए , जुटा लिया हैं सब सामान !२ !
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एक क्लिक से खुल जाता हैं - एक अदभुत संसार !१ !
घर बैठे ही कर लीजिए - प्यार हो या व्यापार !२ !
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जिसके पास बड़ा बंगला - महँगी कार , वही आज इज्जत का हकदार !१ !
कर्म भले ही जैसे हो , होती हैं उसकी ही जय जयकार !२!
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टेक्नोलॉजी ने जीवन कर दिया कितना आसान, एक क्लिक पर दुनिया तमाम  !१ !
 कहीं जाने की जरूरत नही हैं अब , एक स्मार्टफ़ोन से होंगे आपके सारे काम !२ !
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शॉर्टकट सब ढूंढे , मेहनत कोई अब क्यों करे ? !१ !

स्मार्ट बनने के इस जमाने मे समय जाया क्यों करे? !२ !

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