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Tuesday, June 28, 2016

आधुनिक कहकहे - भाग -५

हर ज़िंदगी की अपनी कहानी , अलग अलग हैं दास्तान !१!
कोई मेहनत से लिखता , किसी पर किस्मत मेहरबान !२!
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समय एक सा नही रहता , गाँठ बांध लीजिए यह  बात !१!
झक उजाला हैं भी अगर , अपनी बारी आनी हैं  रात !२!
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सुनी सुनाई बातो पर मत कीजिए यकीन !१!
अफवाहो का बाजार गर्म हैं चलते रहते हैं तीर !२!
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"हाँ जी" नौकरी हैं , "ना जी" का घर !१!
बचा के रखिए नौकरी, नही तो दरबदर !२!
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सच्चा प्यार मिल जाये तो उसकी करिये कद्र !१!
दिखलावटी संसार मे किसी को किसी की नही हैं फिक्र !२! 
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ज्ञान देना - अभिमान नहीं , धन देना - अहंकार नहीं !१!
स्वास्थ्य देना - रोग नहीं , जीवन हँस कर जीना - रो कर नहीं !२!
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लक्ष्य बनाइये जीवन का , तब कुछ हासिल हो पाय !१!
समय अपनी चाल चलता रहे  , और जीवन बीत जाय !२!
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यादों की पोटली में बांधते रहिये कुछ खुशनुमा पल !१!
जीवन सफर में जब उदास हो, गुदगुदाएंगे ये पल !२!
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सुबह आँख खोलते ही लीजिए उस प्रभु का नाम !१!
एक नया सवेरा फिर दिया , करने पूरे काम !२!
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मुमकिन कोशिश करिये - दीजिये अपने सपनो को उड़ान !१!
मुश्किल थोड़ा आये भी अगर - मत टूटने दीजिये विश्वास !२!

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