Tuesday, August 2, 2016

गुजारिश

ज़िन्दगी कुछ चाहती रही , हम कुछ और चाहते रहे !
कशमकश  चलती रही , फासले बढ़ते गए !!

ज़िन्दगी दिल से चलती रही , हम दिमाग की सुनते रहे !
चले दोनों एक साथ थे , अब मीलो के फ़ासले हो गए !!

वो मेरी एक मुस्कान को तरसती रही !
हम बेफिजूल उस पर झल्लाते रहे !!

वो अब भी हर रोज़ फिर से मौका देती हैं !
मुस्करा कर हर रोज़ स्वागत करती हैं !!

हम उलझे रहते हैं हर रोज़ , उसकी मुस्कान को किनारा करते हैं !
वह हर रोज़ अपनी वफ़ा निभाती हैं, उसकी हिम्मत की दाद देते हैं !!

उसकी तो गुजारिश बस इतनी सी रहती हैं !
जब तक साथ हूँ , जी भर के मुस्कराते जी ले !! 

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