Amazon-Buy the products

Thursday, January 28, 2016

एक अदद इंसान ढूँढ रहा हूँ .......................



बढ़ती बेरुखी अपने माता पिता से देख , एकश्रवण कुमार’ ढूँढ रहा हूँ !
गुरु शिष्यों में एक 'द्रोणाचार्य' और एक 'अर्जुन' ढूँढ रहा हूँ !!

सत्ता के लिए सब कुछ भूल जाने वालो के बीच एक "सिद्धार्थ" ढूंढ रहा हूँ !
ज्ञान की खोज करते एक नरेंद्र नाथ 'विवेकानंद ' ढूँढ रहा हूँ !!

पति पत्नी के रिश्तो के बीच 'सत्यवान -सावित्री' खोज रहा हूँ !
सत्य और असत्य की कशमकश में 'हरिश्चंद्र ' ढूंढ रहा हूँ !!

मातृभूमि की रक्षा में जो जान गवां दे ऐसा वीर ' अब्दुल हमीद ' ढूंढ रहा हूँ !
भाई भाई के बीच बढ़ती दूरियाँ देख एक 'भरत ' ढूंढ रहा हूँ !!

सत्तासीन लोगो में 'राजऋषि जनक ' ढूंढ रहा हूँ !
दोस्ती की परिभाषा फिर गड़ने "कृष्ण -सुदामा' खोज  रहा हूँ !!

अपने वचनो पर जो कायम रह सके एक 'देवव्रत - भीष्म ' खोज रहा हूँ !
निःस्वार्थ सेवा करे जो एक ' मदर टेरेसा ' ढूँढ रहा हूँ !!

दानी लोगो के बीच कोई  'कर्ण ' ढूंढ़ रहा हूँ !
समाज कल्याण के लिए कोई 'दधीचि ' खोज रहा हूँ !!

प्यार की गहराई समझाने  एक 'मीराढूँढ रहा हूँ !
भक्तो में एक 'प्रह्लाद' खोज रहा हूँ !!

फिर एक अदद इंसान  खोज रहा हूँ। 

मानवता के कल्याण के लिए फिर एक मानक " आज " ढूँढ रहा हूँ !!

Sunday, January 24, 2016

जय हो , गणतंत्र !

जय हो , गणतंत्र !


राजपथ  पर देखकर वैभव हर साल निहाल होता हूँ !
देश मेरा तरक्की पर हैं , हर बार सोच लेता हूँ !!

सैन्य शक्ति देखकर सीमाओ को सुरक्षित समझ लेता हूँ !
रंग बिरंगा राजपथ देखकर "देश मेरा एक हैं " जान लेता हूँ !!

यक्ष प्रश्न फिर भी हर रोज़ परिलक्षित होता हैं !
"सब कुछ ठीक हैं जब " मेरे देश में , फिर हर रोज़ हंगामा क्यों होता हैं ? !!

काश ! हम गणतंत्र को समझ पाते !
लाखो कुर्बानियो का महत्व जान पाते !!

गणतंत्र के पावन ग्रन्थ - संविधान को समझ पाते !
अधिकारों की  हर बार बात करने वाले कर्तव्यो को भी निभाते !!

६६ वर्ष बीत गए - हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए ?
चले थे किस ओर हम , किस ओर पहुँच गए ?

जनता से , जनता द्वारा , जनता के लिए - जनसेवको को देश चलाना था  !
जनता को देश विकास में अपना हिस्सा निभाना था !!

धर्म , जात पात , ऊँच - नीच , अगड़ो - पिछडो का भेद मिटाना था !
भारत माँ के गौरव का रथ आगे बढ़ाना था !!

मुबारक हो गणतंत्र सबको  , एक और सरकारी छुट्टी आयी हैं !
देश को चलाने का ठेका नेताओ को देकर , हमने चैन की नींद पायी हैं !

जय हो , गणतंत्र ! जय हो , गणतंत्र ! जय हो , गणतंत्र !

Thursday, January 21, 2016

बात कहूँगा सीधी और सरल सी


बात कहूँगा सीधी और सरल सी ,  इधर की  उधर की !
 ऊपर की ,  नीचे की ,
 दायें की ,  बायें की ,
 उत्तर की ,  दक्षिण की ,
 पूरब की ,  पश्चिम की ,
 धर्म की   कर्म की ,
 अमीरी की ,  गरीबी की ,
 जात की ,  पात की ,
 ज्ञान की ,  अज्ञान की ,
 उत्थान की ,  पतन की ,
 हार की ,  जीत की ,
 युद्ध की ,  शांति की ,
 मंदिर की ,  मस्जिद की ,
 सिख की ,  ईसाई की ,
 रोज़गार की ,  बेरोजगारी की ,
 हँसी की ,  रोने की ,
 आशा की ,  निराशा की ,
 सहिन्षुणता की ,  असहिन्षुणता की ,
 राजनीति की ,  राजनीतिज्ञों की ,
 शिक्षा की ,  अशिक्षा की ,
 तर्क की ,  वितर्क की ,
 दिन की ,  रात की ,
 सुबह की ,  शाम की ,
 प्रकाश की ,  अन्धकार की ,
 महंगाई की ,  भ्रस्टाचार की ,
 बच्चो के भविष्य की ,  महिलाओ की सुरक्षा की ,
 लाचार बुजुर्गो की ,  दिशाहीन नौजवानो की ,
 संस्कार की ,  कुसंस्कार की ,
 स्टार की ,  सुपरस्टार की ,
 खेल की ,  खिलाडी की ,
 समाज की ,  विज्ञानं की ,
 बंगाल की ,  आसाम  की ,
गुजरात की , पंजाब की
 ऊँच की ,  नीच की ,
 अगड़ो की ,  पिछडो की ,

बस इतना सा कहूँगा की , कब फिक्र होगी हमें अपने भारत माँ  की ?!!