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Sunday, August 21, 2016

सलाम हैं सिंधु और साक्षी


नाज है बेटियो पर आज हिंदुस्तान को !
साक्षी और सिंधु ने लाज बचायी हैं !!

रियो के खेलकुंभ में आपने ही !
विजय पताका फहराई हैं !! 

जब रियो में तुमने तिरंगा फहराया !
भारत का एक  एक कोना गौरव से फूला समाया !!

जब जब हिंदुस्तान की इज़्ज़त की बात आयी हैं !
धन्य हैं इस माटी की , बेटियाँ ही काम आयी हैं !!

लड़की को बोझ समझने वालो के मुहं पर ! 
ये एक जोरदार तमाचा हैं !!

सिंधु और साक्षी आज सारे हिंदुस्तान को !
तुम दोनों पर फख्र हैं !! 

Wednesday, August 10, 2016

जागो देश के नौनिहालो !

जागो देश के नौनिहालो !
देश आज पुकार रहा !!

देकर मुझे नेताओ के हाथ !
तू क्यों सो रहा ? !!

क्या इसीलिए लाखो ने अपनी क़ुरबानी दी थी ? !
मेरी आज़ादी के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़ी थी !!

माना की तू अपनी रोज़ी रोटी कमाने में व्यस्त हैं !
मगर याद रख - मेरा भी तो तुझपर क़र्ज़ हैं !!

स्वार्थी भेड़िये मुझे नोच नोच कर खा रहे हैं !
अपना दीन ईमान सब बेच रहे हैं !!

रोम रोम मेरा काँप रहा  !
क्योंकि मेरा लाल अभी सो रहा !!

वर्दी वालो ने वर्दी बेच दी !
नेताओ ने शर्म बेच दी !!

कोई धर्म के नाम पर गरिया रहा !
कोई जात पात की रोटियां सेंक रहा !!

देख कर मेरे घर की हालात !
अदना पडोसी भी धमका रहा !!

चाल दुश्मन चल रहा ,भाई भाई में फूट डाल रहा  !
गंगा जमुना की तहजीब में विष कोई घोल रहा !!

माँ बहनो की इज्जत से रोज़ खिलवाड़ हो रहा !
क्योंकि मेरा लाल अभी सो रहा !!

अब भी अगर न उठा तू , बहुत देर हो जाएगी !

तेरी "भारत माता" फिर से गुलामी की जंजीरो में जकड जायेगी !! 

Monday, August 8, 2016

आजादी मतलब ज़िम्मेदारी !


खुशकिस्मत हैं हमआज़ाद देश के बाशिंदे हैं !
गुलामी के दंश और  चाबुक की मार नहीं झेले हैं !!

खुशकिस्मत हैं हम , आज़ादी विरासत में पाए हैं !
जुल्मो और अत्याचारो को हमारे पुरखे सहे हैं !!

खुशकिस्मत हैं हमारे पुरखे ,  अपना बलिदान दे गए !
हमारे आज के लिए अपना सर्वस्व त्याग गए !!

खुशकिस्मत हैं हम , आज़ादी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार बन गयी !
परतंत्रता हमारे लिए किताबी बात हो गयी  !!

यक्ष प्रश्न आज सामने खड़ा और पूछ रहा !
आज़ादी के साथ की जिम्मेदारी को फिर कैसे भूल गए ? !!

अधिकारों को लेकर हर जगह हंगामा हैं !
कर्तव्यों के लिए क्यों सन्नाटा पसरा हैं ?!!

आज़ादी सिर्फ अधिकारों का झोला नहीं हैं !
इस झोले में कर्तव्यों का  वजन भी  भारी हैं !!

आजादी का  जश्न मनाये , कर्तव्यों को  याद रखे !
देश हमारी जिम्मेदारी हैं , इसका हमेशा मान रखे !! 

अपनी अगली पीढ़ी को हमें राह दिखानी हैं !

पुरखो से मिली इस आज़ादी को सही सलामत उनको देकर जानी हैं !!

( आज़ादी की ७० वीं वर्षगांठ पर देश को समर्पित ) 

Tuesday, August 2, 2016

गुजारिश

ज़िन्दगी कुछ चाहती रही , हम कुछ और चाहते रहे !
कशमकश  चलती रही , फासले बढ़ते गए !!

ज़िन्दगी दिल से चलती रही , हम दिमाग की सुनते रहे !
चले दोनों एक साथ थे , अब मीलो के फ़ासले हो गए !!

वो मेरी एक मुस्कान को तरसती रही !
हम बेफिजूल उस पर झल्लाते रहे !!

वो अब भी हर रोज़ फिर से मौका देती हैं !
मुस्करा कर हर रोज़ स्वागत करती हैं !!

हम उलझे रहते हैं हर रोज़ , उसकी मुस्कान को किनारा करते हैं !
वह हर रोज़ अपनी वफ़ा निभाती हैं, उसकी हिम्मत की दाद देते हैं !!

उसकी तो गुजारिश बस इतनी सी रहती हैं !
जब तक साथ हूँ , जी भर के मुस्कराते जी ले !!